स्नेहन (Lubrication)-  

             जब दो सरफेसें एक-दूसरे के विपरीत रगड़ खाती हैं तो घर्षण-ताप और घिसावट को कम करने के लिए स्नेहन की आवश्यकता होती है। यदि स्नेहक को सही तरह से प्रयोग में लाया जाए तो वह धातु से धातु का स्पर्श रोक देता है। इनकी प्रयोग में लाई जाने वाली मात्रा व प्रकार, उठाए गए लोड व सरफेसों की संबंधित स्पीड पर निर्भर करती है।

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 स्नेहन के उद्देश्य (Purposes of Lubrication)-

 👉मूविंग पार्ट्स के बीच घर्षण कम करना। 
👉घर्षण के द्वारा उत्पन्न ताप को दूर करना। 
👉मूविंग पार्ट्स को ठण्डा करना। 
👉घिसावट को रोकना। 
👉बियरिंग सरफेसों को जंग व क्षय से बचाना। 
👉शोर को कम करना। 
👉मशीनों की क्षमता में सुधार लाना। 
👉लोड को विभाजित करना। 

 स्नेहक (Lubricants)-

             स्नेहक एक पदार्थ है जो कि मेटिंग पार्ट्स के बीच घर्षण को कम करता है। स्नेहक को निम्नलिखित ग्रुपों में बांटा जा सकता है 

(a) लीक्विड 
(b) सेमी-लीक्विड और 
(c) सॉलिड 

 लीक्विड स्नेहक (Liquld Lubricants) – 

 लीक्विड को निम्नलिखित में उपविभाजित किया जाता है 

 👉मिनरल ऑयल-  मिनरल तेलों में विभिन्न स्ट्रक्चरों और मोलिक्यूलर भारों के हाइड्रोकार्बन्स मिलाए जाते हैं। ये मुख्यत: पैराफिन, नफथेलिन और एरोमेटिक्स होते हैं। मिनरल आयल को उसके प्रयोग के अनुसार चयन किया जाता है।

👉 फैटी या वेजिटेबल ऑयल्स – हाई प्रैशर के अधीन फ्रिक्शन करने वाले मेटीरियल्स की तरह फैटी या वेजिटेबल ऑयल को प्रयोग में लाना पहली पसंद है और इनका अधिकतर प्रयोग बाउंड्री लुब्रिकेशन में किया जाता है। केस्टर ऑयल, ओलिव ऑयल, रोजिन ऑयल इत्यादि प्रयोग में लाए जाने वाले वेजिटेबल ऑयल्स हैं। 

👉 सिंथेटिक ऑयल्स-  सिंथेटिक (कृत्रिम) ऑयल्स पोलियाल्किलीन ग्लाइकोल्स (Polyalkylene Glycols) और उनकी उत्पत्ति के उत्पादक हैं। सिलिकन कार्बाइड्स उपयुक्त केमिकल विधियों द्वारा सिलिकन लुब्रिकेट्स को बनाया जाता है।

👉 सेमी-लीक्विड स्नेहक (Seml-Liquid Lubrlcants)-  ग्रीसे सेमी-लीक्विड लुब्रिकेंट्स होती हैं जिनकी विस्कोसिटी तेल की अपेक्षा उच्च होती है। इनका प्रयोग धीमी स्पीड और हैवी प्रैशर आपरेशनों के लिए किया जाता है जैसे ड्राइंग, रोलिंग आैर एक्रटूरशन प्रोसेसिस। सॉलिड 

👉स्नेहक (Solid Lubricants)-  ग्रेफाइट अधिकतर प्रयोग में लाया जाने वाला सॉलिड लुब्रिकेंट है । सोप स्टोन, टाल्क, फ्रेंच चॉक इत्यादि अन्य सॉलिड लुब्रिकेंट्स हैं। 

 स्नेहक के गुण (Properties of Lubricants) 

 👉विस्कोसिटी (Viscosity)- 

यह किसी लीक्विड के बहाव की डिग्री है। ऑयल फ्रिक्शन की यह बेसिक क्वालिटी है। ऑयल फिल्म बनना इसी क्वालिटी पर निर्भर करता है। 

👉 ऑयलीनैस (Oiliness) – 

यह वेटेबिलिटी, सरफेस टेंशन और स्लिप्रिनैस का मिश्रण है। यह तेल की वह क्षमता है जिससे वह धातुओं पर तेलीय सरफेस छोड़ देती है। 

 👉फ्लैश प्वाइंट (Flash Point) – 

यह वह तापमान है जिस पर तेल को बिना आग पकड़े, पर्याप्त धुआ निकलता है। पोर प्वाइंट (Pour Point) – यह वह न्यूनतम तापमान है जिस पर तेल बहुता है।

 स्नेहन विधियां (Lubrication.Methods)- 

👉 फोस्स्ड फीड (Forced Feed) – ग्रीस उपस्नेहक और सामान्य प्रयोग में लाए जाने वाले पम्प फोस्ड फीड के सिद्धान्त पर आधारित होते हैं। ग्रीस को शाफ्ट पर कसकर दबा दिया जाता है। 

 👉स्पलैश विधि (Splash Method) – इस सिस्टम में, स्नेहक एक सम्प (Sump) में बना रहता है, और सिस्टम में एक या दो बाहर निकले पार्ट्स तेल को सभी पार्ट्स छिड़काव करते हैं जिससे विश्वस्तता सुनिश्चित हो जाती है।

 👉ग्रेविटी फीड (Gravity Feed) – इस सिस्टम में, ग्रेविटी के सिद्धान्त का प्रयोग किया जाता है जिसमें तेल को स्टोरेज बोतल या नमदों (Felts) या बत्तियों (Wicks) से धीरे-धीरे सरफेस पर पास किया जाता है। यदि तेल का लेवल ठीक हो या तेल का सम्प ठीक-ठीक हो तो यह स्रोत विश्वसनीय होता है। इस लेवल को चैक करने के लिए प्राय: ऑयल स्टिक्स या आयल लेवल कप्स उपलब्ध कराए जाते हैं।

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