Iti fitter trade theory || Marking and marking methods in Hindi ||


MARKING AND MARKING METHOD

दोस्तों अगर आप एक फिटर के स्टूडेंट है तो आपको मार्किंग और मार्किंग मेथड्स के बारे में जानकारी होना आवश्यक है तो इसलिए आज हम इस पोस्ट में मार्किंग और मार्किंग मेथड्स के बारे में जानेंगे

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Marking (मार्किंग) :-


किसी मशीन पार्ट विशेषता  फिटिंग ऑपरेशन में मशीनिंग करना या हैंड टूल्स द्वारा कटिंग करने से पहले गाइडलाइन ओं की मार्किंग या लेआउट करना एक महत्वपूर्ण कदम है

Marking and marking methods in hindi


Marking Media (मार्किंग मीडिया):- 

जैसा कि धातु एक कठोर पदार्थ इसलिए खींची जाने वाली रेखाएं हमें साफ दिखाई नहीं पड़ती  है इसलिए लेआउट करते समय मार्किंग मीडिया का प्रयोग किया जाता है इस प्रकार मार्किंग मीडिया एक पदार्थ है जिसे  धातु के सतह पर पर लगाया जाता है जिस पर मार्किंग करनी होती है जिससे मार्किंग की लाइनें साफ साफ दिखाई दे सके चौक, लेआउट ,डाई ,कॉपर सल्फेट ,वाइटवॉश सामान्य प्रयोग में लाए जाने वाले कुछ मार्किंग मीडिया

* प्रशियन ब्लू:-

प्रशियन ब्लू एक रंग है जिसका प्रयोग मेटल वर्किंग में और मशीनिंग करने के लिए रफ पार्ट्स पर मारकिंग करने के लिए किया जाता है इसका प्रयोग धातु के पीस पर रंगिया पेंट करने के लिए किया जाता है जिसमें डाई की बहुत पतली परत लगाई जाती है इससे स्क्राइबर या किसी शार्प इंस्ट्रूमेंट के द्वारा चमकीला प्रकट करने के लिए स्क्रैच किया जा सकता है तथा इस रंग के नीचे धातु पर एक बहुत महीन लाइन बन जाती है 

                      ड्रेस मैटेरियल पर मार्किंग करने के लिए चौक का प्रयोग किया जाता है यदि कोई गलती हो जाती है तो इसे आसानी से मिटाया जा सकता है अथवा इसकी बड़ी हानि यह है कि यह पानी पड़ने पर मिट जाएगी या धूल जाएगी इसलिए इसका प्रयोग वहां पर किया जाता है जहां पर स्थाई लाइनों की आवश्यकता होती है

* चौक स्ट्रिंग लाइन:-

चौक स्ट्रिंग लाइन चौक से भरा हुआ एक टूल है जैसे ही इसे कंटेनर से खींचा जाता है यह दूरी को चौक की धूल से कोट कर देता है इसका प्रयोग बड़े  जॉबो  की मार्किंग करने के लिए किया जाता है इसका प्रयोग करने के लिए इसके कंटेनर से दूरी की आवश्यक लंबाई को खींचे और यह प्रयोग करने के लिए तैयार है मार्किंग करने वाली आवश्यक पोजीशन पर एक सिरे को पकड़ने के लिए एक सहायक को कहें और इसे मार्किंग करने वाली पोजीशन पर कसकर खींचे तब अपने दूसरे हाथ से धागे को सीधा ऊपर उठाएं और छोरे डोरी से एक सीधी चौक धूल वाली लाइन जॉब पर ट्रांसफर हो जाएगी इसका प्रयोग मार्किंग करने के लिए लंबी लाइन बनाने के लिए किया जाता है

METHOD OF MARKING (मार्किंग की विधियां)

1. Detum Line Method (डेटम लाइन मेथड):-

इस विधि में पहले एक बेस लाइन को लगाया जाता है जिसे डेटम लाइन कहते हैं आगे की सभी लाइने इससे पहले लगाई गई लाइन से लगाई जाती है यह विधि वहां पर प्रयोग की जाती है जहां पर जॉब की संगलन भुजाए समकोण में फिनिश की जाती है

2. Center Line Method (सेंट्रल लाइन विधि):-

मार्किंग की यह विधि विषम आकार वाले जॉबो पर प्रयोग में लाई जाती है पहले अंदर से एक सेंटर लाइन लगा ली जाती है और इस सेंटर लाइन के संदर्भ में मार्किंग की अन्य लाइनें लगाई जाती है


3. Marking by template (टेंप्लेट द्वारा मार्किंग):-

इस विधि में मार्किंग के लिए टेंप्लेट का प्रयोग किया जाता है जो कि आकार के अनुपात में पतली मेटल शीट से बनाई जाती है मार्किंग की इस विधि के द्वारा समरूप आकार वाले jobo  मार्किं की जाती है


मार्किंग करने के लिए जरूरी सामान और इंस्ट्रुमेंट्स:- 

1. सरफेस प्लेट

2. मार्किंग टेबल
3. स्क्राइबर
4. डिवाइडर 
5. ट्रेमल
6. कैलिपर 
7.प्रिक पंच 
8.सरफेस गेज,
इत्यादि इसी तरह के बहुत सारे सामान्य इंस्ट्रूमेंट का प्रयोग किया जाता है

दोस्तो

 आज के पोस्ट में बस इतना ही दोस्तों हमारा पोस्ट आपको कैसा लगा कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए धन्यवाद



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