ITI Fitter Trade Theory- Filing Techniques in Hindi

 फाइलिंग तकनीकें (Filing Techniques)

1. स्ट्रेट फाइलिंग (Straight Filing) – 

जहाँ तक सम्भव हो फाइल को सीधा धकेलकर यह फाइलिंग की जाती है। यह सरफेस अच्छी दिखावट वाली बनाती है क्योंकि फाइल के निशान एक ही दिशा में होते हैं।

2. क्रॉस फाइलिंग (Cross Filing)- 

इस फाइलिंग में, फाइलिंग स्ट्रोक को पहले वर्कपीस के ऐज से एक ऐंगुलरदिशा में लगाया जाता है और इसके बाद फाइलिंग की दिशा बदली जाती है।

3. ड्रा फाइलिंग (Draw Filling)-

इस फाइलिंग में, फाइलिंग स्ट्रोक की दिशा फाइल के अक्ष के लम्बरूप में होती है।इस फाइलिंग में फाइल को दोनों सिरों को हाथों के द्वारा पकड़कर उसे वर्कपीस पर आगे-पीछे चलाया जाता है।

4. कर्व फाइलिंग (Curve Filling)-

इस फाइलिंग को गोल जॉबों पर किया जाता है और फाइल को सक्क्युलर ऐक्शन में मूव किया जाता है।

5. कार्नर की गोलाई बनाना (Rounding a Corner) – 

इस विधि से सुनिश्चित हो जाता है कि फाइल के दाँते सभी समय कटिंग करते हैं। इस तकनीक का प्रयोग करने से पहले कार्नर से अधिकतर धातु को दूर कर लेना चाहिए।

6. होल को बढ़ाना (Enlarging a Hole) – 

फाइल के प्रत्येक स्ट्रोक के साथ फाइल को वृत्त का एक चौथाई मूव करना चाहिए। इससे फाइल के द्वारा एक स्थान पर ग्रूव नहीं बनता।

7. एक कार्नर में फाइलिंग करना (Filing into a Corner)- 

कार्नर के प्रत्येक ऐज को अलग समझना चाहिए, जिससे अन्य ऐज नष्ट न हो सकेगा एक सेफ ऐज फाइल (हैंड फाइल) का प्रयोग किया जाता है; कार्नर के विरुद्ध सेफ ऐज फाइल का प्रयोग किया जाता है।

8. पतले मेटीरियल की फाइलिंग करना (Filing Thin Material) – 

पतले मेटीरियल्स की जब फाइलिंग की जाती है तो ये अधिक कम्पन करते हैं और यदि धातु को उसकी चौड़ाई के आर-पार फाइल किया जाता है तो वह मुड भी जाती है। धातु को नीचे करके और लाइन के नजदीक क्लेम्प करना चाहिए, फाइल को लम्बाई के साथ न्यून कोण पर पकड़ना चाहिए परन्तु फाइलिंग लम्बाई के साथ-साथ करनी चाहिए। 

9. मोटे मेटीरियल की फाइलिंग करना (Filing Thick Material) – 

फाइल को धातु के ऐज के साथ एक कोण में प्रयोग करना चाहिए और समय-समय पर फाइलिंग की दिशा बदलनी चाहिए। फाइल के स्क्रैचों को आसानी से देखा जा सकता है और इससे धातु पर ग्रव या हॉलो फार्मिंग होने से रोकने में सहायता मिलती है। यदि जॉब के एक भाग की रफ ऐज से अधिक दूरी पर फाइलिंग करने की आवश्यकता हो तो हैंडल के कारण फाइल धातु पर बिल्कुल फ्लैट नहीं पड़ती। इस पर पार पाने के लिए, फाइल टैंग को कुछ कोण में मोड़ देना चाहिए जिससे हैंडल धातु से ऊपर उठ जाता है। तब फाइल का प्रयोग करना चाहिए। 

10. साफ्ट धातुओं की फाइलिंग करना (Filing Soft Materials)- 

साफ्ट मेटीरियल्स की फाइलिंग करने के लिए स्पेशल फाइल को बनाया जाता है । इन फाइलों पर विशेष आकार के दांते होते हैं जिससे ये साफ्ट धातुओं को आसानी से काट सकती हैं और चिप्स दाँतों में नहीं फंसते। यदि ये फाइल उपलब्ध न हों तो खराब दातों वाली फाइल का प्रयोग करना चाहिए जिससे यदि इसके दाँतों में चिप्स फँस जाएं और साफ न किए जा सकें तो इसे फैंका जा सकता है या केवल इस प्रयोग के लिए छोड़ा जा सकता है।

11. स्केल को दूर करना (Removing Scale) – 

स्टील या कास्ट ऑयरन पर स्केल उसकी धातु की अपेक्षा हार्ड होती है। यदि इसे नार्मल तरह से फाइल किया जाता है तो यह फाइल के दाँतों को शीघ्रता से ब्लंट कर देती है और इस प्रकार फाइल प्रयोग करने लायक नहीं रहती। फाइलिंग करने से पहले स्टील पर स्केल को फाइल की ‘टो’ या ऐज से दूर किया जाता है। कास्ट आयरन पर स्केल को पहले चिपिंग या ग्राइंडिंग दोनों में से किसी एक को करके दूर किया जाता है।

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